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छपरा में बाढ़ का कहर: हाईवे पर जल रही चिताएं, घर-खेत-खलिहान डूबे

छपरा सारण से डॉ देशराज बिक्रांत की रिपोर्ट 

छपरा (सारण, बिहार) — गंगा, गंडक, सरयू और सोन नदी में आई बाढ़ ने सारण जिले में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। निचले इलाकों के खेत-खलिहान, घर-द्वार पूरी तरह जलमग्न हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि पारंपरिक श्मशान घाट डूब जाने के कारण लोग मजबूरी में छपरा–पटना मुख्य मार्ग के किनारे अंतिम संस्कार कर रहे हैं। यह हृदयविदारक दृश्य स्थानीय लोगों को गहरे तक झकझोर रहा है।

श्मशान घाट डूबे, सड़क बनी चिता स्थल

आमी घाट सहित सभी पारंपरिक श्मशान घाट बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं। शव जलाने के लिए भूमि उपलब्ध न होने से लोग सड़क पर ही चिता जलाने को विवश हैं।

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“घाट डूब चुके हैं। शव जलाने के लिए जमीन नहीं मिल रही है। मजबूरन अंतिम संस्कार सड़क किनारे करना पड़ रहा है। प्रशासन के इंतज़ाम नाकाफी हैं।” — एक स्थानीय निवासी

गंगा–गंडक–सरयू उफान पर

  • गंगा, गंडक, सरयू और सोन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
  • ग्रामीण ही नहीं, शहरी क्षेत्र भी बाढ़ की चपेट में हैं।
  • खेतों में खड़ी फसलें और सब्जी की खेती पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।
  • नगर पालिका चौक, मोना चौक, दलदली रोड, सोनार पट्टी समेत कई मोहल्लों में पानी भर गया है।
  • अधूरे खनुआ नाला निर्माण के कारण जलनिकासी बाधित है।

सड़कों पर शरण

दियारा क्षेत्र के गांव जलमग्न हैं। मांझी, दिघवारा, सोनपुर, परमानंदपुर जैसे इलाकों में पानी घरों की ऊपरी मंजिल तक पहुंच गया है।
लोग मवेशियों के साथ सड़क किनारे और डिवाइडर पर शरण ले रहे हैं।

प्रशासनिक दावे बनाम जमीनी हकीकत

प्रशासन सामुदायिक किचन और राहत सामग्री उपलब्ध कराने का दावा कर रहा है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि जमीनी स्तर पर कोई ठोस सहायता नहीं मिल रही।

“अधिकारी सिर्फ बयानबाज़ी कर रहे हैं, जबकि बाढ़ पीड़ित बिना मदद के गुजर-बसर कर रहे हैं।”

स्थिति गंभीर

हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और जलस्तर बढ़ने से संकट और गहरा सकता है। प्रशासन के लिए राहत और पुनर्वास की चुनौती अब और बड़ी हो गई है।

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